6 नवंबर, 2026  |  06:12 IST
Jila Nazar
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
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यूपी में कांग्रेस की ताकत बनाम सीटों की चाह

संपादकीय... ✍️

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यूपी में कांग्रेस की ताकत बनाम सीटों की चाह

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस हासिल करना है। पार्टी अभी संगठन मजबूत करने की स्थिति में है, लेकिन सीटों की दावेदारी ऐसी है, जैसे उसका स्वतंत्र जनाधार निर्णायक हो। प्रियंका गांधी वाड्रा को चुनावी तैयारी और समाजवादी पार्टी से तालमेल की जिम्मेदारी देना इसी विरोधाभास को उजागर करता है।

कांग्रेस की वापसी का दावा करने वालों को 2019 और 2022 के चुनावी परिणामों पर भी नजर डालनी चाहिए। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी रायबरेली की सीट बचा पाई, जबकि अमेठी में राहुल गांधी को हार का सामना करना पड़ा। 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी के नेतृत्व में महिला-केंद्रित अभियान और ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ जैसे नारों के बावजूद कांग्रेस 403 में से केवल दो सीटें जीत सकी। उसका वोट प्रतिशत भी 2.33 प्रतिशत पर सिमट गया।

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2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा के साथ 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और छह सीटें जीतीं। यह गठबंधन की सफलता थी, लेकिन इसे कांग्रेस की स्वतंत्र राजनीतिक ताकत का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। सपा ने 62 सीटों पर चुनाव लड़कर 37 सीटें हासिल कीं। इससे दोनों दलों की चुनावी हैसियत का अंतर स्पष्ट होता है।

प्रियंका गांधी के सामने सबसे बड़ी परीक्षा यही है कि वह कांग्रेस को गठबंधन की मजबूरी से निकालकर स्वतंत्र राजनीतिक पहचान कैसे दें। इसके लिए केवल रैलियां, बैठकें और बड़े-बड़े दावे पर्याप्त नहीं होंगे। जिला इकाइयों को सक्रिय करना, प्रभावशाली स्थानीय नेतृत्व तैयार करना और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम खड़ी करना जरूरी है।

अखिलेश यादव भी कांग्रेस को सीटें राजनीतिक भावनाओं के आधार पर नहीं, चुनावी लाभ के हिसाब से देंगे। कांग्रेस को भी यह समझना होगा कि गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी का रास्ता मजबूत संगठन और जीतने की क्षमता से होकर गुजरता है।

2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए केवल सत्ता परिवर्तन की कोशिश नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करने का अवसर है। बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा जैसे मुद्दों पर ठोस विकल्प देना होगा।

प्रियंका गांधी की असली परीक्षा सीटों की संख्या बढ़ाने में नहीं, कांग्रेस की जीतने की क्षमता बढ़ाने में है। वरना कांग्रेस एक बार फिर अपनी ताकत से ज्यादा सीटों की चाह में अपनी राजनीतिक कमजोरियों का ही हिसाब देती नजर आएगी।

   - सन्त कुमार भारद्वाज

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