मऊरानीपुर (झांसी)। मऊरानीपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम कुरैचा स्थित काली सरकार मंदिर परिसर में बने कुटिया से 12 वर्षीय बालक के साथ कथित अप्राकृतिक कृत्य का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार की शिकायत पर मंदिर के पुजारी प्रदीप शुक्ला उर्फ नटरोज के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वहीं, अब इस प्रकरण में कथित दलाली, मोटी रकम लेकर राजीनामा कराने और पीड़ित परिवार को धमकाकर दबाव बनाने के आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कुरैचा निवासी सुखराम पुत्र म्यादीन ने क्षेत्राधिकारी मऊरानीपुर को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि उनके 12 वर्षीय नाती के साथ काली सरकार मंदिर परिसर में बनी कुटिया में कथित गलत कृत्य किया गया। शिकायत में मंदिर के पुजारी प्रदीप शुक्ला उर्फ नटरोज को नामजद करते हुए पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने 29 अक्टूबर 2026 को शाम 7:35 बजे मुकदमा अपराध संख्या 488/2026 दर्ज किया। पुलिस अभिलेखों के मुताबिक, मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3), पॉक्सो एक्ट तथा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(द), 3(2)(V) एवं 3(2)(VA) के तहत कार्रवाई की गई है।
मुकदमा दर्ज होते ही कथित समझौताबाजों की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले में पीड़ित परिवार की ओर से कुछ अन्य लोगों पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग मामले को दबाने के लिए राजीनामे का दबाव बना रहे हैं। बड़ी रकम लेकर समझौता कराने की कोशिशों और परिवार को धमकाने के आरोप भी सामने आए हैं। ऐसे में पुलिस के सामने अब केवल दर्ज मुकदमे की जांच ही नहीं, बल्कि इन कथित गतिविधियों की सच्चाई सामने लाने की भी चुनौती है।
पत्रकारिता की आड़ में कथित दलाली करने वालों पर भी हो जांच
गंभीर आपराधिक मामलों में यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की आड़ लेकर दलाली करता है, पुलिस से कथित नजदीकी का दबाव दिखाता है या पीड़ित परिवार को धन और धमकी के जरिए समझौते के लिए मजबूर करता है तो ऐसे कृत्यों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट करना जरूरी है। आरोप प्रमाणित होने पर किसी भी व्यक्ति को उसके पद, पहचान या कथित रसूख के आधार पर राहत नहीं मिलनी चाहिए।
अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पीड़ित परिवार को बिना किसी दबाव के न्याय मिल पाएगा? क्या कथित तौर पर राजीनामे की सौदेबाजी और धमकियां देने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी? पुलिस को पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए बालक के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायत में बताए गए अन्य पहलुओं की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
फिलहाल मुकदमा दर्ज होने के बाद क्षेत्र में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि मऊरानीपुर पुलिस इस संवेदनशील प्रकरण में कितनी गंभीरता से कार्रवाई करती है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ कथित दलाली एवं दबाव बनाने वालों के आरोपों की सच्चाई भी सामने लाती है।





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