आगरा। आगरा खंड स्नातक एवं शिक्षक एमएलसी चुनाव के मतदान के दौरान फतेहाबाद में उठे विवाद ने राजनीतिक घमासान का रूप ले लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा नेता और पूर्व मंत्री रामसकल गुर्जर पर वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। वहीं, रामसकल गुर्जर ने आरोपों को खारिज करते हुए सपा पर संभावित हार की आशंका से बौखलाने का पलटवार किया है।
शुक्रवार को हुए मतदान के दौरान सपा ने फतेहाबाद के मतदान केंद्रों पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और वोट लूटने के आरोप लगाए। पार्टी का दावा है कि मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। इस मामले में सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने भी रामसकल गुर्जर पर तीखे राजनीतिक हमले किए। आरोपों के सामने आने के बाद एमएलसी चुनाव को लेकर जिले की सियासत में उबाल आ गया है।


अखिलेश के आरोपों पर रामसकल का पलटवार
भाजपा नेता रामसकल गुर्जर ने सपा के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पार्टी अपनी संभावित हार को देखकर बौखला गई है। उनके मुताबिक, सपा नेता एक ओर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करते हैं, लेकिन जब बैलेट पेपर से मतदान हो रहा है, तब भी आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनादेश को स्वीकार करने के बजाय बिना तथ्यों के आरोप लगाना सपा की हताशा को दर्शाता है।
सपा से भाजपा तक का राजनीतिक सफर
रामसकल गुर्जर का राजनीतिक सफर भी इस विवाद को खास बनाता है। वह कभी पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते थे और समाजवादी पार्टी में उनका खासा प्रभाव था। एमएलसी बनने के बाद वह सपा सरकार में राज्यमंत्री भी बने। हालांकि, बाद में उन्होंने सपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।
आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई सियासत
फतेहाबाद में मतदान के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर सपा ने मतदान की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी ओर भाजपा नेता ने इन आरोपों को राजनीतिक हताशा बताया है। अब इस पूरे विवाद में लगाए गए आरोपों की सत्यता और मतदान प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों पर सबकी निगाहें टिकी हैं।





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