2 नवंबर, 2026  |  07:46 IST
विज्ञापन
Billboard 1275x450

दंडमुक्ति का अंधकार और पत्रकारिता का उजाला

संपादकीय... ✍️

⏱ 1 मिनट में पढ़ें👁 12 बार पढ़ा गया
दंडमुक्ति का अंधकार और पत्रकारिता का उजाला

प्रत्येक वर्ष 02 नवंबर को विश्व समुदाय ‘पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में दंडमुक्ति समाप्त करने का अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ मनाता है। यह दिवस केवल एक स्मृति-दिवस नहीं, अपितु सत्य की रक्षा में समर्पित उन प्राणों की मौन पुकार है, जिन्होंने सत्ता के अहंकार, अपराध के गठजोड़ और अज्ञान के अंधकार के विरुद्ध कलम को शस्त्र बनाया। जब सच्चाई की आवाज़ को गोलियों से दबाया जाता है और हत्यारे खुले आकाश के नीचे निर्भय विचरण करते हैं, तब समाज का विवेक स्वयं प्रश्न करता है- क्या हमने स्वतंत्रता के उस स्तंभ को खो दिया है, जिस पर लोकतंत्र का भवन टिका होता है?

पत्रकारिता मात्र समाचारों का संकलन नहीं, अपितु लोकतंत्र की आत्मा की धड़कन है। जब कोई पत्रकार भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर करता है, अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाता है या सत्ता के दुरुपयोग को प्रकाश में लाता है, तो वह केवल समाचार नहीं लिखता- वह समाज की अंतरात्मा को जगाता है। किंतु इसी जागरण का मूल्य कई बार प्राणों से चुकाना पड़ता है। विश्व भर में सैकड़ों पत्रकार हिंसा, अपहरण, यातना और हत्या के शिकार होते हैं, और अधिकांश मामलों में अपराधी दंड से मुक्त रह जाते हैं। यह दंडमुक्ति न केवल व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि सामूहिक विवेक की हत्या है। जब अपराधी को न्याय का भय नहीं रहता, तब सत्य स्वयं निर्वासित हो जाता है।

विज्ञापन
WhatsApp

भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र में भी पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता निरंतर चुनौतियों से घिरी रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक, खोजी पत्रकारिता अक्सर खतरे की छाया में कार्य करती है। यदि हम इस दंडमुक्ति की संस्कृति को समाप्त नहीं करते, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल आधिकारिक विज्ञप्तियों को ही ‘समाचार’ समझेंगी।

यह दिवस हमें याद दिलाता है कि पत्रकारों की सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, अपितु सभ्यता का नैतिक दायित्व है। सरकारों को निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करनी होगी, न्यायपालिका को शीघ्रता से न्याय देना होगा और समाज को सत्य के रक्षकों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करनी होगी। जब कलम सुरक्षित होगी, तभी लोकतंत्र का दीप अखंड जलता रहेगा। 02 नवंबर केवल स्मरण का दिन नहीं - यह संकल्प का दिन है कि हम दंडमुक्ति के अंधकार को समाप्त कर सत्य के उजाले को अविचल बनाए रखेंगे।

• सन्त कुमार भारद्वाज

यह खबर शेयर करें
jilanazar.com
jilanazar.com · सम्पादकीय डेस्क jilanazar.com की और खबरें →

यह भी पढ़ें

टिप्पणियाँ

इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।