2 नवंबर, 2026  |  00:23 IST
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मऊरानीपुर में अवैध कच्ची शराब के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान!

कारोबार बंद नहीं हुआ तो 2027 के चुनाव का बहिष्कार करेंगे नागरिक,मुख्यमंत्री योगी से हस्तक्षेप की मांग

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मऊरानीपुर में अवैध कच्ची शराब के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान!

मऊरानीपुर (झांसी)। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता के लिए अपनी अलग पहचान रखने वाला मऊरानीपुर नगर मिनी अयोध्या के नाम से भी जाना जाता है। नगर में चारों तरफ प्रसिद्ध धार्मिक मंदिर और आस्था के प्रमुख स्थल स्थित हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है। लेकिन दूसरी ओर नगर के सबसे खूबसूरत सार्वजनिक स्थलों में शामिल सुखनई नदी घाट के आसपास कथित अवैध कच्ची शराब की बिक्री का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। सोशल मीडिया पर शराब की बिक्री से जुड़े वीडियो वायरल होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देने से स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मऊरानीपुर के कुछ स्वाभिमानी नागरिकों ने अपनी पहचान और गोपनीयता उजागर न करने की शर्त पर इस गंभीर समस्या के खिलाफ आवाज उठाई है। उनका कहना है कि नगर में लंबे समय से कथित अवैध कच्ची शराब का कारोबार संचालित हो रहा है। यदि जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी इस पर शीघ्र रोक नहीं लगाते और अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह समाप्त नहीं कराया जाता, तो आगामी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने का निर्णय लिया जा सकता है। नागरिकों का कहना है कि जब बार-बार शिकायतों और वीडियो वायरल होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा, तो आखिर आम जनता अपनी आवाज किसके सामने उठाए?

"सुखनई घाट पर कथित अवैध शराब बिक्री से परेशान नागरिकों ने गोपनीयता बनाए रखने की शर्त पर उठाई आवाज, विधायक-सांसद और नगर पालिका नेतृत्व की चुप्पी पर भी जताई नाराजगी"

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सुखनई नदी घाट मऊरानीपुर का प्रमुख और रमणीय सार्वजनिक स्थल है। नगरवासी सुबह-शाम यहां परिवार के साथ सैर करने और खुले वातावरण का आनंद लेने पहुंचते हैं। नदी के आसपास विवाह घर, बच्चों के विद्यालय और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के घर-मकान स्थित हैं। यहां महिलाएं, बहन-बेटियां, छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी प्रतिदिन घूमने के लिए आते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी क्षेत्र में सुबह सूर्योदय से पहले कथित रूप से कच्ची शराब की बिक्री शुरू हो जाती है और देर रात तक यह सिलसिला जारी रहता है।

नागरिकों का कहना है कि शराब का सेवन करने के बाद कुछ लोगों द्वारा गाली-गलौज, अभद्रता और आपसी विवाद किए जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। इससे परिवारों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। जिस सुखनई घाट पर लोग सुकून और स्वच्छ वातावरण की तलाश में पहुंचते हैं, वहां इस तरह की गतिविधियों से सार्वजनिक माहौल प्रभावित हो रहा है।

मिनी अयोध्या की धार्मिक पहचान पर भी उठे सवाल

मऊरानीपुर को मिनी अयोध्या के नाम से पहचान दिलाने वाले धार्मिक और चर्चित मंदिरों के आसपास बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान वाले नगर में सार्वजनिक स्थलों के आसपास कथित अवैध शराब का कारोबार होना चिंता का विषय है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर की धार्मिक गरिमा, सामाजिक मर्यादा और आम लोगों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रशासन को विशेष अभियान चलाना चाहिए।

विधायक, सांसद और नगर पालिका नेतृत्व की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी नागरिकों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि विधायक हों या सांसद, नगर पालिका अध्यक्ष हों अथवा अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि, अब तक अवैध कच्ची शराब के कारोबार के खिलाफ कोई प्रभावी अभियान दिखाई नहीं दिया। नागरिकों का दावा है कि इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों की ओर से उच्च अधिकारियों तक कोई ठोस सामूहिक पहल या लिखित ज्ञापन दिए जाने की जानकारी भी सामने नहीं आई है।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब नगर में लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है और सोशल मीडिया पर आए दिन वीडियो वायरल हो रहे हैं, तो आखिर जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहे हैं?

जहरीली शराब से जनहानि का खतरा, कार्रवाई में देरी क्यों?

प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जहरीली शराब के सेवन से पूर्व में कई लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में अवैध रूप से तैयार और बेची जाने वाली कच्ची शराब जनस्वास्थ्य और जनसुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। कुछ स्थानीय नागरिकों ने पुलिस और आबकारी विभाग के कर्मचारियों पर कथित मिलीभगत तथा सुविधा शुल्क लेकर इस कारोबार की अनदेखी करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में उच्च अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है। नागरिकों का दावा है कि इस समस्या को लेकर कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले का तत्काल संज्ञान लेने तथा जिलाधिकारी झांसी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिला आबकारी अधिकारी से सुखनई नदी घाट सहित नगर के अन्य संदिग्ध स्थानों पर संयुक्त छापेमारी अभियान चलाने की मांग की है। साथ ही अवैध शराब के निर्माण, आपूर्ति और बिक्री में शामिल लोगों की पहचान कर कठोर कानूनी कार्रवाई तथा संबंधित विभागों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है।

2027 के चुनाव बहिष्कार की चेतावनी से प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

मऊरानीपुर के नागरिकों द्वारा गोपनीयता बनाए रखते हुए उठाई गई आवाज अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए गंभीर संदेश मानी जा रही है। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि अवैध कच्ची और कथित जहरीली शराब के कारोबार पर समय रहते पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया गया, तो वे 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने का निर्णय ले सकते हैं। यह चेतावनी केवल शराब बिक्री के खिलाफ नाराजगी नहीं, बल्कि लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा कर रहे नागरिकों की प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग भी है। 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मिनी अयोध्या के नाम से पहचान रखने वाला मऊरानीपुर आखिर कब अवैध कच्ची शराब के कारोबार से मुक्त होगा? क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करेंगे? क्या विधायक, सांसद और नगर पालिका नेतृत्व जनता की इस आवाज को गंभीरता से लेंगे? या फिर नागरिकों को अपनी मांग मनवाने के लिए 2027 के चुनाव बहिष्कार जैसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ेगा? अब नगरवासियों को आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस और निर्णायक कार्रवाई का इंतजार है।

 

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