6 नवंबर, 2026  |  06:29 IST
Jila Nazar
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
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धनतेरस आज: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथा

पं. राजकिशोर शर्मा (राजगुरु महाराज)... ✍️

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धनतेरस आज: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं कथा

दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का शुभारंभ धनतेरस से होता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में धन, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के अधिपति कुबेर देव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही सोना, चांदी, बर्तन और अन्य नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है।

धनतेरस का वास्तविक संदेश केवल धन अर्जित करना नहीं, बल्कि जीवन में स्वास्थ्य, संतुलन, सदाचार और समृद्धि को महत्व देना है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि स्वस्थ शरीर, संतुष्ट मन और परिवार की खुशहाली ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है।

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  - धनतेरस 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 10:30 बजे से प्रारंभ होकर 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि विद्यमान होने के कारण धनतेरस की मुख्य पूजा 6 नवंबर की शाम को की जाएगी।

नई दिल्ली के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक निर्धारित है। यह समय प्रदोष काल और वृषभ लग्न के संयोग से बना है। अन्य शहरों में स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।

मुंबई में शाम 6:35 से 8:35 बजे, कोलकाता में 5:28 से 7:26 बजे, चेन्नई में 6:14 से 8:10 बजे, बेंगलुरु में 6:25 से 8:20 बजे, आगरा में 6:03 बजे से 7:59 बजे तथा जयपुर में 6:11 से 8:07 बजे तक 

पूजा का शुभ समय बताया गया है। श्रद्धालुओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित करना चाहिए।

  - समुद्र मंथन से प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि

धनतेरस से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं में समुद्र मंथन की कथा का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए क्षीर सागर का मंथन किया, तब अनेक दिव्य रत्न प्रकट हुए। इसी मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए।

भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। उनके प्राकट्य के कारण ही धनतेरस को आरोग्य और दीर्घायु की कामना का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन उनकी पूजा कर परिवार के सभी सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की प्रार्थना की जाती है।

यह कथा हमें बताती है कि धन और वैभव का वास्तविक आनंद तभी संभव है, जब शरीर स्वस्थ हो और मन प्रसन्न रहे। स्वास्थ्य के बिना संसार की बड़ी से बड़ी संपत्ति भी अधूरी है।

पं. राजकिशोर शर्मा (राजगुरु महाराज)

  - यमराज और राजकुमार की कथा

धनतेरस पर यम दीपदान की परंपरा के पीछे एक अन्य प्रचलित कथा है। मान्यता के अनुसार, एक राजा के पुत्र की जन्मकुंडली देखकर ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि विवाह के चौथे दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी।

निर्धारित दिन निकट आने पर राजकुमार की पत्नी ने अपने पति को मृत्यु से बचाने का उपाय किया। उसने घर के मुख्य द्वार पर सोने-चांदी के आभूषण और धन-संपत्ति रख दी तथा पूरी रात दीपक जलाकर जागती रही। वह अपने पति को जगाए रखने के लिए कथा और गीत सुनाती रही।

कथा के अनुसार, यमराज सर्प का रूप धारण कर राजकुमार के कक्ष की ओर बढ़े, लेकिन दीपकों की चमक और आभूषणों की चकाचौंध से उनकी दृष्टि प्रभावित हुई। वे भीतर प्रवेश नहीं कर सके और अंततः लौट गए।

इसी मान्यता के आधार पर धनतेरस की रात यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है। इसे अकाल मृत्यु से रक्षा और परिवार की मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।

  - धनतेरस की पूजा विधि

धनतेरस के दिन प्रातःकाल घर की साफ-सफाई कर मुख्य द्वार को रंगोली, तोरण और दीपकों से सजाना चाहिए। संध्या के समय पूजा स्थल पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें।

पूजा के लिए रोली, अक्षत, हल्दी, पुष्प, धूप, दीपक, घी, मिठाई, फल, साबुत धनिया, बताशे और जल से भरा कलश रखें। यदि इस दिन कोई नई वस्तु खरीदी है, तो उसे भी पूजा स्थल पर रखकर श्रद्धापूर्वक पूजन करें।

सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान कर पूजा प्रारंभ करें। इसके बाद भगवान धन्वंतरि को पुष्प अर्पित करते हुए ‘ॐ धन्वंतरये नमः’ मंत्र का जाप करें। माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा धन के सदुपयोग की कामना करें।

इसके बाद घी का दीपक जलाकर आरती करें और भगवान से परिवार में सुख, शांति, स्वास्थ्य तथा सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने की प्रार्थना करें।

पूजा के उपरांत मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। इसके लिए तेल या घी का दीपक जलाया जाता है। यह दीपदान जीवन की रक्षा और परिवार की मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।

  - धनतेरस पर क्या खरीदें?

धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन, नए आभूषण, झाड़ू, साबुत धनिया और नए बहीखाते खरीदना शुभ माना जाता है। व्यापारी वर्ग इस दिन नए बहीखाते का पूजन कर कारोबार में उन्नति की कामना करता है।

कुछ परंपराओं में लोहे, कांच और काले रंग की वस्तुओं की खरीद से परहेज किया जाता है। हालांकि, ये मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं। खरीदारी के लिए त्रयोदशी तिथि का ध्यान रखना चाहिए और अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही वस्तुएं खरीदनी चाहिए।

धनतेरस पर खरीदारी का उद्देश्य दिखावा या अनावश्यक खर्च नहीं, बल्कि शुभता और समृद्धि की कामना होना चाहिए। जरूरत के अनुसार उपयोगी वस्तुएं खरीदना भी इस पर्व की भावना के अनुरूप है।

  - धनतेरस का आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश

धनतेरस हमें धन के साथ स्वास्थ्य, सुरक्षा और संतुलित जीवन का महत्व समझाता है। भगवान धन्वंतरि आरोग्य के, माता लक्ष्मी समृद्धि के और कुबेर देव धन के संरक्षण के प्रतीक हैं। यम दीपदान जीवन के प्रति आस्था, आशा और सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है।

इस पावन अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि परिवार की खुशहाली के साथ समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता भी करेंगे। घर में दीप जलाने के साथ किसी जरूरतमंद के जीवन में आशा का प्रकाश पहुंचाना ही पर्व की सच्ची सार्थकता है।

धनतेरस के इस पावन पर्व पर सभी के जीवन में सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव की कृपा सभी परिवारों पर बनी रहे।

जय माता लक्ष्मी। जय भगवान धन्वंतरि।

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