मऊरानीपुर (झांसी)। मऊरानीपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम कुरैंचा स्थित काली सरकार मंदिर के संचालक प्रदीप शुक्ला उर्फ नटरोज का मामला लगातार चर्चा में है। भूतकाल और भविष्य बताने के दावों से चर्चित हुए बाबा के खिलाफ नाबालिग शिष्य के साथ दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस ने उसके खिलाफ पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
इस बीच हरदोई निवासी प्रदीप शुक्ला का पुराना आपराधिक इतिहास भी चर्चा में आ गया है। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड में वर्ष 1987 से 2002 के बीच उसके खिलाफ 13 मुकदमों का उल्लेख मिलता है। इनमें लूट, डकैती, हत्या के प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट जैसी धाराओं में कार्रवाई का विवरण शामिल है। हरदोई से झांसी पहुंचने के बाद वह सत्यानंद शुक्ला उर्फ काली सरकार के नाम से चर्चित हुआ।
शिवेंद्र के घायल होने पर पुलिस और परिजन आमने-सामने
इसी प्रकरण में कुरैंचा स्थित एक ढाबे से पीड़ित पक्ष के परिजन शिवेंद्र श्रीवास को ले जाने के बाद घायल अवस्था में मऊरानीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने का मामला सामने आया। परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर वाहन से नीचे फेंकने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का दावा है कि शिवेंद्र ने पुलिस अभिरक्षा से भागने का प्रयास किया और सड़क पर गिरकर घायल हो गया। पुलिस ने उसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है।
कथित पत्रकारों की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में अब कुछ कथित पत्रकारों की भूमिका को लेकर भी गंभीर चर्चाएं और आरोप सामने आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग कथित तौर पर पैसे लेकर समझौता कराने और काली सरकार के दरबार को संचालित बनाए रखने में भूमिका निभा रहे थे। हालांकि, इन दावों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि क्या किसी व्यक्ति ने पत्रकारिता की आड़ में समझौते कराने अथवा किसी गतिविधि को संरक्षण देने का प्रयास किया।
उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
पूरे प्रकरण में पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की जा रही है कि नाबालिग से जुड़े मामले, शिवेंद्र के घायल होने की परिस्थितियों और कथित आर्थिक लेन-देन की अलग-अलग निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी पत्रकार, बिचौलिए या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को अपनी पहचान या प्रभाव का इस्तेमाल कर कानून से बचने का अवसर नहीं मिलना चाहिए।
आखिर काली सरकार के इस पूरे प्रकरण में कौन-कौन लोग जुड़े हैं? समझौते और पैसों के लेन-देन के दावों में कितनी सच्चाई है? शिवेंद्र किन परिस्थितियों में घायल हुआ? इन सभी सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
देखिए चर्चित वीडियो और जानिए मऊरानीपुर कोतवाली क्षेत्र के इस पूरे मामले की परत-दर-परत कहानी।







टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।