आगरा। मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड और पति की हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद आगरा की हिंदू महासभा जिलाध्यक्ष मीरा राठौर चर्चा में हैं। उन्होंने दोनों मामलों की दोषी महिलाओं मुस्कान रस्तोगी और रविता को फांसी देने के लिए स्वयं जल्लाद की भूमिका निभाने की इच्छा जताई है। इसके लिए उन्होंने मथुरा के जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर अनुमति मांगी है।

मीरा राठौर का कहना है कि यदि प्रशासन उन्हें अनुमति देता है, तो वह यह जिम्मेदारी बिना किसी पारिश्रमिक के निभाने को तैयार हैं। उन्होंने फांसी से पहले दोनों महिलाओं को गंगाजल से शुद्ध करने की बात भी कही है। हालांकि, उनके प्रार्थना पत्र पर प्रशासन का क्या रुख रहेगा, यह स्पष्ट नहीं है।

कौन हैं मीरा राठौर?

मीरा राठौर आगरा की रहने वाली हैं और अखिल भारत हिंदू महासभा की जिला अध्यक्ष हैं। वह धार्मिक एवं सामाजिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता और मुखर बयानों के कारण चर्चा में रहती हैं। ताजमहल परिसर में पूजा करने तथा महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने के प्रयास को लेकर भी वह सुर्खियों में रही हैं।
इसके अलावा, कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की महिलाओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में उन्होंने मथुरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में परिवाद दायर किया था।

क्या है मेरठ का सांप-कांड?
मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में 12 अप्रैल 2025 को अमित कश्यप की हत्या कर दी गई थी। अगले दिन उसका शव घर में चारपाई पर मिला। शव पर सांप के डसने जैसे निशान थे और नीचे एक जिंदा सांप दबा हुआ था। शुरुआत में परिजनों को भी सर्पदंश से मौत होने का संदेह हुआ।
हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आई। इसके बाद अमित के भाई मोनू कश्यप ने उसकी पत्नी रविता और अमरदीप के खिलाफ हत्या की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 16 अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।

नीले ड्रम में मिला था सौरभ का शव
मेरठ के ही चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी ठहराया गया। आरोपों के मुताबिक, मार्च 2025 में सौरभ की हत्या करने के बाद उसके शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में रखे गए और सीमेंट भरकर छिपाने की कोशिश की गई।
पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।
दोनों मामलों में मृत्युदंड के फैसलों के बीच मीरा राठौर का जल्लाद बनने के लिए आवेदन देना चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, किसी को फांसी देने की प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक नियमों के अधीन होती है। उनके आवेदन पर अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।





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