7 नवंबर, 2026  |  15:59 IST
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दीपावली महापर्व के बीच भगवान श्री चित्रगुप्त जयंती

संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार

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दीपावली महापर्व के बीच भगवान श्री चित्रगुप्त जयंती

दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व के बीच कायस्थ समाज के लिए भगवान श्री चित्रगुप्त जयंती का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि, जिसे यम द्वितीया और भाई दूज भी कहा जाता है, पर भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर को कलम-दवात पूजा के रूप में भी जाना जाता है। यह पर्व ज्ञान, शिक्षा, लेखनी और कर्मों के लेखा-जोखा के प्रति आस्था का प्रतीक है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि के प्रत्येक जीव के अच्छे-बुरे कर्मों का लेखा-जोखा रखने के लिए एक विशेष शक्ति की कल्पना की। इसके लिए उन्होंने वर्षों तक तपस्या की। मान्यता है कि उनकी काया से भगवान चित्रगुप्त का प्राकट्य हुआ। इसी कारण उन्हें कायस्थ कहा गया। भगवान ब्रह्मा ने उन्हें मनुष्यों के कर्मों का हिसाब रखने और धर्मराज यम के दरबार में न्याय व्यवस्था में सहयोग करने का दायित्व सौंपा। तभी से भगवान चित्रगुप्त कायस्थ समाज के आराध्य और कुलदेवता माने जाते हैं।

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चित्रगुप्त जयंती पर कायस्थ परिवारों में कलम-दवात की विशेष पूजा होती है। घरों और प्रतिष्ठानों में भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधि-विधान से पूजन किया जाता है। कलम, दवात, पुस्तकों और बही-खातों को पूजा में शामिल किया जाता है। कई परिवारों में कोरे कागज पर आय-व्यय का विवरण लिखने के साथ ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः मंत्र अंकित करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि पूजा के दौरान लेखनी को विश्राम दिया जाता है और पूजन के बाद ही दोबारा उसका प्रयोग किया जाता है।

इस पर्व का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह ईमानदारी, पारदर्शिता, न्याय और सदाचार का संदेश भी देता है। भगवान चित्रगुप्त की आराधना हमें स्मरण कराती है कि मनुष्य का प्रत्येक कर्म महत्वपूर्ण है और उसके परिणामों से कोई बच नहीं सकता।

आधुनिक युग में भी इस पर्व की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, साहित्य और तकनीक के क्षेत्र में कलम और ज्ञान की भूमिका सर्वोपरि है। दीपावली की रोशनी के बीच भगवान श्री चित्रगुप्त जयंती हमें यह संदेश देती है कि वास्तविक समृद्धि धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक और अच्छे कर्मों से प्राप्त होती है। कलम की पूजा वस्तुतः ज्ञान के प्रकाश और नैतिक जीवन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का उत्सव है।

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