लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बोतलबंद पानी (पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर और मिनरल वॉटर) की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने बड़ा फैसला लिया है। FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के आदेश के अनुसार अब नई इकाइयों को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का प्रमाणन मिलने के बाद ही खाद्य सुरक्षा लाइसेंस या पंजीकरण जारी किया जाएगा।
प्रदेश में पहले से संचालित 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक BIS प्रमाणन लेना अनिवार्य है। तय समयसीमा में प्रमाणन न लेने वाली इकाइयों का लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित कर दिया जाएगा और उत्पादन बंद कराया जाएगा। यह आदेश केंद्रीय लाइसेंस वाली इकाइयों पर भी लागू होगा।
पिछले एक साल में FSDA ने 811 इकाइयों का निरीक्षण कर 660 नमूने एकत्र किए। इनमें से 513 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे (लगभग 78 प्रतिशत), जिनमें 176 स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाए गए। पहले ही 152 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं और 55 केंद्रीय लाइसेंसधारी इकाइयों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि 2024 में FSSAI द्वारा अनिवार्य ISI/BIS प्रमाणन हटाने के बाद इकाइयों की संख्या बढ़ गई थी और गुणवत्ता में गंभीर खामियां सामने आईं। अब उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रमाणन फिर अनिवार्य कर दिया गया है।





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