5 नवंबर, 2026  |  00:07 IST
Jila Nazar
गुरुवार, 5 नवंबर 2026
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पराली जलाने में मथुरा प्रदेश में अव्वल, 73 घटनाएं दर्ज

मथुरा। पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की कार्रवाई और जागरूकता अभियान के बावजूद खेतों में आग लगाने का सिलसिला जारी है। इसका नतीजा है कि प्रदेश में मथुरा पराली जलाने के मामलों में पहले स्थान प…

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पराली जलाने में मथुरा प्रदेश में अव्वल, 73 घटनाएं दर्ज

मथुरा। पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की कार्रवाई और जागरूकता अभियान के बावजूद खेतों में आग लगाने का सिलसिला जारी है। इसका नतीजा है कि प्रदेश में मथुरा पराली जलाने के मामलों में पहले स्थान पर पहुंच गया है। 15 सितंबर से दो नवंबर तक जिले में ऐसी 73 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस दौरान अलीगढ़ में 39, पीलीभीत में 17, फर्रुखाबाद में 14 और गौतमबुद्ध नगर में 13 मामले सामने आए।प्रशासन ने पराली जलाने के आरोप में 21 किसानों पर कुल 1.45 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। हालांकि, इसमें से अब तक सिर्फ 30 हजार रुपये ही वसूले जा सके हैं। जिले में धान की अगैती खेती और कटाई का दौर पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।मथुरा में धान का रकबा करीब एक लाख सात हजार हेक्टेयर है। अधिकांश क्षेत्रों में हार्वेस्टर से फसल काटे जाने के कारण खेतों में फसल के अवशेष रह जाते हैं। अगली फसल की बुवाई के लिए खेत तैयार करने की जल्दबाजी में कुछ किसान इन अवशेषों को आग लगाकर हटाते हैं।जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह के अनुसार, पराली प्रबंधन के लिए किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और बेलर मशीनों पर अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा पराली से खाद और भूसा तैयार करने के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभागीय कर्मचारी गांवों में पहुंचकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष इसी अवधि तक पराली जलाने के 93 मामले दर्ज हुए थे।नियमों के तहत दो एकड़ से कम जमीन पर पराली जलाने पर 2,500 से 5,000 रुपये, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि पर 15 हजार से 30 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

 

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