27 अक्टूबर, 2026  |  02:09 IST
Jila Nazar
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
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लोकतंत्र की कसौटी पर चुनावी पारदर्शिता

संपादकीय... ✍️

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लोकतंत्र की कसौटी पर चुनावी पारदर्शिता

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक विश्वसनीयता बड़े सवाल बनकर उभर रहे हैं। आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तीन मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश और समाजवादी पार्टी की ओर से मतदान में अनियमितताओं के आरोपों ने चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

चुनाव आयोग ने आगरा के तीन केंद्रों पर हुए मतदान को निरस्त कर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया। सपा ने कई जिलों में कथित बूथ कैप्चरिंग और अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। लोकतंत्र में आरोप लगाना राजनीतिक अधिकार है, लेकिन उनकी निष्पक्ष जांच करना संवैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

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मतदाता सूची में नामों की शुद्धता, पात्र नागरिकों का पंजीकरण और मतदान केंद्रों पर निष्पक्ष प्रक्रिया किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद हैं। यदि किसी मतदाता को अपने अधिकार के इस्तेमाल में बाधा आती है, तो शिकायत के त्वरित निस्तारण और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। चुनाव की विश्वसनीयता केवल परिणाम से नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया से तय होती है जिसके जरिए परिणाम सामने आता है।

इसी बीच भाजपा भी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 30 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदेश भाजपा की बैठक में संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित सभी दलों के सामने जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता साबित करने की चुनौती है। राजनीतिक दलों को आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करना होगा।

लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष और जवाबदेह सत्ता, दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठें तो उनका समाधान पारदर्शी जांच से होना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से। आखिरकार चुनाव किसी दल की प्रतिष्ठा का ही नहीं, जनता के अधिकारों और संवैधानिक व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी प्रश्न है। लोकतंत्र की असली जीत तभी होगी, जब हर मतदाता को यह भरोसा हो कि उसका वोट सुरक्षित है और उसकी आवाज का सम्मान होता है।

सन्त कुमार भारद्वाज

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