26 अक्टूबर, 2026  |  19:30 IST
Jila Nazar
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
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शिक्षक एमएलसी पुनर्मतदान में हंगामा, फर्जी वोटिंग के आरोपों से गरमाया माहौल

फतेहाबाद और सैंया में सपा-भाजपा कार्यकर्ता आमने-सामने, पुलिस कमिश्नर ने संभाली स्थिति; खेरागढ़ में मतदान के आंकड़ों को लेकर भी उठे सवाल

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शिक्षक एमएलसी पुनर्मतदान में हंगामा, फर्जी वोटिंग के आरोपों से गरमाया माहौल

आगरा। आगरा में खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव के पुनर्मतदान के दौरान सोमवार को कुछ मतदान केंद्रों पर सपा और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक और हंगामे की स्थिति बन गई। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने फर्जी मतदान का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराया। हंगामे की सूचना पर पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार भी मौके पर पहुंचे।

जानकारी के मुताबिक, फतेहाबाद विकास खंड के बूथ संख्या 26 पर मतदान के दौरान एक वोटर को लेकर विवाद शुरू हो गया। सपा एजेंट ने संबंधित व्यक्ति को भाजपा कार्यकर्ता बताते हुए उसके फर्जी मतदाता होने का आरोप लगाया। एजेंट ने बूथ के अंदर फर्जी वोट डाले जाने की भी आशंका जताई। इसको लेकर मतदान केंद्र पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात भी सामने आई है।

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इसी तरह सैंया विकास खंड में मतदान के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने कथित फर्जी वोटिंग का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इसी बीच भाजपा कार्यकर्ताओं के पहुंचने से दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और उनके बीच तीखी तकरार हुई। पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार भी मौके पर पहुंचे।

सपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुनर्मतदान के दौरान भाजपा से जुड़े लोग फर्जी मतदान करने पहुंचे थे। उन्हें रोकने का प्रयास करने पर जबरदस्ती की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

खेरागढ़ में मतदान के आंकड़ों पर सवाल

इस बीच खेरागढ़ बूथ पर मतदान के आंकड़ों को लेकर भी असमंजस की स्थिति सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, बूथ पर कुल 438 मतों में से 226 वोट पड़ने की जानकारी सामने आई, जबकि पहले हुए मतदान में 432 वोट पड़ने का दावा किया जा रहा है। इन आंकड़ों के अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि के बिना आंकड़ों की स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।

पुनर्मतदान के दौरान सामने आए विवादों और आरोपों के बीच निष्पक्ष मतदान तथा मतदान संबंधी आंकड़ों की पारदर्शिता को लेकर प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

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