बदायूं। उत्तर प्रदेश की सियासत में पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बदायूं सीट से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज करने वाली संघमित्रा को 2024 में पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया था। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य और पार्टी में भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे। सार्वजनिक मंच पर उनके भावुक होने की घटना ने भी सियासी चर्चाओं को हवा दी थी।
अब उनके पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ जुड़ने के बाद संघमित्रा के अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि वह भाजपा से अलग होकर कांग्रेस का दामन थाम सकती हैं और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में बदायूं की बिल्सी सीट से मैदान में उतर सकती हैं।

हालांकि, इन चर्चाओं के बीच संघमित्रा मौर्य ने भाजपा छोड़ने की अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह भाजपा में हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव उनका चुनाव नहीं है।
संघमित्रा के इस बयान के बाद कांग्रेस में शामिल होने और बिल्सी से चुनाव लड़ने की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगता नजर आ रहा है। ऐसे में पिता की राजनीतिक राह से अलग अपनी पहचान बनाए रखने वाली संघमित्रा आगे क्या भूमिका निभाती हैं, यह आने वाला समय बताएगा।
फिलहाल उनकी ओर से भाजपा छोड़ने या कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन चर्चाओं को अभी राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।





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