26 अक्टूबर, 2026  |  01:52 IST
Jila Nazar
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
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ऑनलाइन शॉपिंग या मुफ्त की रेंटल दुकान, पहनकर लौटाने वालों ने बिगाड़ा खेल!

सेंटी गुरु का तंजनामा... ✍️

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ऑनलाइन शॉपिंग या मुफ्त की रेंटल दुकान, पहनकर लौटाने वालों ने बिगाड़ा खेल!

अरे ओ ऑनलाइन शॉपिंग के महारथियो! जरा कान खोलकर सुन लो। सेंटी गुरु बाजार की गलियों से लेकर मोबाइल की स्क्रीन तक तहलका मचाने आ गए हैं। आगरा में फ्लिपकार्ट की पार्सल डिलीवरी बंद होने की चर्चा ने गुरुजी के कान खड़े कर दिए। वजह क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अपनी जगह, लेकिन ऑनलाइन खरीदारी के नाम पर सामान इस्तेमाल करके लौटाने का खेल जरूर एक बड़ा सवाल है।

अमेजन हो, मिंत्रा हो या फ्लिपकार्ट, इनकी आसान रिटर्न पॉलिसी ने ग्राहकों को सुविधा दी, मगर कुछ लोगों ने सुविधा को ही मुफ्तखोरी का फॉर्मूला बना लिया। अब खरीदारी कम और जुगाड़ ज्यादा चल रहा है!

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गरबा होना है तो दस हजार का लहंगा ऑनलाइन मंगवा लो। शादी-ब्याह में जाना है तो डिजाइनर ड्रेस घर बुला लो। रील बनानी है तो नया आउटफिट हाजिर! फिर कार्यक्रम खत्म, वीडियो वायरल और अगले दिन रिटर्न की अर्जी ‘साइज फिट नहीं हुआ’, ‘क्वालिटी अच्छी नहीं है’ या ‘प्रोडक्ट पसंद नहीं आया।’

वाह रे डिजिटल इंडिया! कपड़े भी ऐसे इस्तेमाल हो रहे हैं, जैसे मोहल्ले की लाइब्रेरी से किताब लेकर पढ़ी और अगले दिन जमा कर दी!

सेंटी गुरु के पड़ोस में भी एक भाभीजी हैं। नए-नए कपड़े आते हैं, कैमरा चमकता है, रील बनती है और फिर पार्सल वापसी की तैयारी! गुरुजी पहले सोचते थे कि आखिर इतने महंगे कपड़ों के लिए रोज-रोज पैसे कहां से आते हैं? अब समझ आया कि मामला खरीदारी का नहीं, कथित ‘किराये की अलमारी’ का है!

लेकिन जरा उस डिलीवरी बॉय का दर्द भी समझिए। कल तक जो डिब्बा खुशी-खुशी पहुंचा रहा था, आज वही वापस लेकर घूम रहा है। पेट्रोल उसका, मेहनत उसकी और ऊपर से ग्राहक की शिकायत का डर भी उसी के सिर!

हालांकि, हर रिटर्न धोखाधड़ी नहीं होता। गलत साइज, खराब सामान और कंपनी की गलती पर वापसी ग्राहक का अधिकार है। परेशानी तब है, जब सुविधा का जानबूझकर दुरुपयोग किया जाए।

सेंटी गुरु बोले  कंपनियां कारोबार करें या मुफ्त की रेंटल दुकान चलाएं? और ग्राहकों से भी विनती है ऑनलाइन शॉपिंग को सुविधा बनाइए, चालाकी का धंधा नहीं।

आखिर में गुरुजी की तंजभरी तुकबंदी

एक कचौड़ी, दो समोसा,

ऑर्डर वाली का क्या भरोसा!

कपड़ा पहना, रील बनाई,

फिर बोली-भैया, पसंद न आई!

याद रखिए, जनाब! रिटर्न पॉलिसी ग्राहक की सुविधा है, किसी की मुफ्त की अलमारी नहीं!

 

सेंटी गुरु

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