28 अक्टूबर, 2026  |  00:52 IST
Jila Nazar
बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
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करवा चौथ पर ज्ञान की दुकानें, आस्था पर तंज कसने वालों की आधुनिकता!

सेंटी गुरु का तंजनामा... ✍️

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करवा चौथ पर ज्ञान की दुकानें, आस्था पर तंज कसने वालों की आधुनिकता!

लो जी, सेंटी गुरु की धमाकेदार एंट्री हो चुकी है! हाथ में करवा चौथ की चर्चा, दिमाग में सामाजिक विसंगतियों का हिसाब और जुबान पर तंज की धार। आते ही देखा कि करवा चौथ का चांद आसमान में निकलने से पहले ही सोशल मीडिया पर ज्ञान के हजारों चांद चमकने लगे। कोई व्रत को गुलामी बता रहा है, कोई इसे महिला विरोधी परंपरा घोषित कर रहा है, तो कोई हिंदू त्योहारों का मजाक उड़ाकर खुद को आधुनिक विचारों का सबसे बड़ा ठेकेदार समझ बैठा है।

सेंटी गुरु ने चश्मा ठीक किया और बोले अरे भाई! आधुनिकता का प्रमाणपत्र बांटने वालों, जरा यह तो बताओ कि किसी महिला का अपनी श्रद्धा से व्रत रखना आपको इतना परेशान क्यों कर रहा है? अगर कोई पत्नी अपने पति की लंबी उम्र की कामना से करवा चौथ मनाती है, तो यह उसकी आस्था और व्यक्तिगत पसंद है। उसे रोकना भी गलत और उसकी पसंद का उपहास उड़ाना भी!

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लेकिन ठहरिए जनाब! सेंटी गुरु किसी परंपरा के नाम पर जबरदस्ती के समर्थक भी नहीं हैं। अगर किसी महिला पर व्रत रखने का दबाव बनाया जाता है, उसकी सेहत की अनदेखी होती है या पति-पत्नी के रिश्ते में समानता नहीं है, तो सवाल उठने ही चाहिए। मगर सवाल और उपहास में फर्क होता है। सुधार की बात करना समझदारी है, जबकि किसी की आस्था को नीचा दिखाकर तालियां बटोरना सिर्फ दिखावटी बौद्धिकता है।

सेंटी गुरु ने सोशल मीडिया के स्वयंभू क्रांतिकारियों से पूछा भाई साहब, महिला की आजादी का मतलब उसे अपनी मर्जी से जीने देना है या उसके लिए अपनी पसंद का नया फरमान जारी करना? अगर महिला व्रत रखे तो पिछड़ी, न रखे तो आधुनिक आखिर उसके फैसले का सम्मान कब होगा? महिला सशक्तीकरण का अर्थ विकल्प देना है, विकल्प छीनना नहीं।

करवा चौथ केवल छलनी से चांद देखने का पर्व नहीं, बल्कि अनेक परिवारों में प्रेम, विश्वास और साथ निभाने की भावना से भी जुड़ा है। समय के साथ परंपराओं में बदलाव आ सकता है। पति-पत्नी दोनों व्रत रखें या अपने तरीके से प्रेम जताएं, यह उनका निजी निर्णय होना चाहिए।

 आखिरी में सेंटी गुरु काकहना है  त्योहार मनाने वाले अंधविश्वासी और उनका मजाक उड़ाने वाले बुद्धिजीवी कैसे हो गए? आलोचना कीजिए, तर्क दीजिए, सुधार की बात कीजिए, मगर किसी की आस्था को अपमानित करके महान बनने की कोशिश मत कीजिए। याद रखिए, चांद में दाग हो सकता है, लेकिन दूसरों की खुशियों में दाग तलाशने वालों की सोच भी बेदाग हो, यह जरूरी नहीं!

सेंटी गुरु

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