भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा केवल आधुनिक हथियारों और अत्याधुनिक तकनीक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर है कि संकट के समय सेना को आवश्यक संसाधन कितनी तेजी और कुशलता से उपलब्ध होते हैं। ऐसे में थल सेना, नौसेना और वायु सेना की आपूर्ति एवं भंडारण व्यवस्था को एक साझा डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की योजना रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग की ओर से प्रस्तावित ‘ट्राइ-सर्विसेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एप्लिकेशन’ का उद्देश्य तीनों सेनाओं के एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सिस्टम को आपस में जोड़ना है। इससे हथियारों, ईंधन और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता एवं आवाजाही पर वास्तविक समय में नजर रखी जा सकेगी। संसाधनों की स्थिति स्पष्ट होने से अनावश्यक दोहराव, भंडारण की अतिरिक्त लागत और आपूर्ति में होने वाली देरी कम करने में मदद मिल सकती है।
वर्तमान दौर में युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। सीमाओं पर तनाव, बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों और तकनीक आधारित सैन्य अभियानों के बीच तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल अनिवार्य हो गया है। साझा लॉजिस्टिक व्यवस्था संसाधनों के अधिकतम उपयोग, त्वरित निर्णय और संयुक्त सैन्य अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक हो सकती है। यह आत्मनिर्भर और आधुनिक रक्षा व्यवस्था की दिशा में भी उपयोगी पहल है।
हालांकि, किसी भी डिजिटल व्यवस्था की सफलता केवल उसके निर्माण से सुनिश्चित नहीं होती। तीनों सेनाओं के अलग-अलग संचालन ढांचे के बीच समन्वय, आंकड़ों की सटीकता, साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की गोपनीयता पर विशेष ध्यान देना होगा। तकनीकी खराबी या साइबर हमले की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।
स्पष्ट है कि साझा लॉजिस्टिक सिस्टम सैन्य आधुनिकीकरण का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि यह व्यवस्था जमीन पर कितनी भरोसेमंद, सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है। बेहतर संसाधन प्रबंधन से मजबूत सैन्य तैयारी का रास्ता खुल सकता है।
सन्त कुमार भारद्वाज





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