12 अक्टूबर, 2026  |  23:43 IST
Jila Nazar
सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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आईएएस-एचसीएस की सफलता: प्रतिभा की उड़ान या संसाधनों की ताकत?

-डॉ. सत्यवान सौरभ

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आईएएस-एचसीएस की सफलता: प्रतिभा की उड़ान या संसाधनों की ताकत?

भारतीय समाज में आईएएस और एचसीएस जैसी प्रशासनिक सेवाओं में चयन को प्रतिभा, परिश्रम और मेधा का प्रतीक माना जाता है। लाखों युवा इन सेवाओं में पहुँचने का सपना देखते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही को मिलती है। ऐसे में एक महत्त्वपूर्ण सवाल उठता है

 क्या इन परीक्षाओं में केवल योग्यता और मेहनत निर्णायक हैं, या आर्थिक स्थिति और पारिवारिक संसाधन भी सफलता की राह को आसान बनाते हैं?

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निस्संदेह, प्रशासनिक सेवाओं में चयन के लिए कठिन परिश्रम, अनुशासन, विषयों की समझ और मानसिक दृढ़ता आवश्यक हैं। लेकिन इन गुणों को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ भी महत्त्वपूर्ण होती हैं। संपन्न परिवार का अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी कर सकता है, महँगी कोचिंग ले सकता है और असफलता के बाद दोबारा प्रयास कर सकता है। इसके विपरीत, किसान, मजदूर या सीमित आय वाले परिवार का प्रतिभाशाली युवा किताबों और परीक्षा शुल्क की व्यवस्था के साथ परिवार की जिम्मेदारियों से भी जूझता है।

कल्पना कीजिए, दो युवाओं की प्रतिभा समान है, लेकिन एक के पास संसाधनों की कमी नहीं और दूसरे को पढ़ाई के साथ आजीविका की चिंता भी करनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में दोनों की प्रतिस्पर्धा केवल परीक्षा हॉल में नहीं, बल्कि उससे पहले ही शुरू हो जाती है। यही अवसरों की असमानता का वास्तविक प्रश्न है।

हालाँकि, यह मानना भी उचित नहीं कि संपन्न परिवारों से आने वाले अभ्यर्थी केवल सुविधाओं के बल पर सफल होते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अनेक युवा अपनी मेहनत से इतिहास रचते हैं, जबकि पर्याप्त संसाधनों के बावजूद कई अभ्यर्थी असफल होते हैं। इसलिए किसी की पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर उसकी योग्यता पर सवाल उठाना अनुचित है। जरूरत इस बात की है कि बहस धारणाओं के बजाय विश्वसनीय आँकड़ों और निष्पक्ष अध्ययन पर आधारित हो।

सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, आधुनिक पुस्तकालय, डिजिटल अध्ययन केंद्र, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और पारदर्शी आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। ग्रामीण युवाओं तक भी वही अवसर पहुँचने चाहिए, जो महानगरों में रहने वाले अभ्यर्थियों को मिलते हैं।

अंततः, सवाल यह नहीं कि कौन सफल हुआ, बल्कि यह है कि किसे अपनी प्रतिभा साबित करने का पर्याप्त अवसर मिला। प्रतिभा किसी वर्ग, गाँव, शहर या आर्थिक स्थिति की बपौती नहीं है। प्रशासनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता तभी सार्थक होगी, जब चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता के साथ तैयारी के अवसर भी अधिक समान हों। जब आर्थिक मजबूरियाँ किसी प्रतिभाशाली युवा के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बनेंगी, तभी योग्यता और अवसर के बीच की दूरी वास्तव में कम हो सकेगी।

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jilanazar.com · सम्पादकीय डेस्क jilanazar.com की और खबरें →

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