23 अक्टूबर, 2026  |  23:46 IST
Jila Nazar
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
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चंद्र सरोवर पर 5100 दीपों से साकार होगी महारास की दिव्य छटा, 1100 लीटर खीर का लगेगा भोग

शरद पूर्णिमा पर परासौली में सजेगी आस्था की अनुपम झांकी, गिरिराजजी के मंदिरों में भी धवल वस्त्रों में होंगे प्रभु के दर्शन

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चंद्र सरोवर पर 5100 दीपों से साकार होगी महारास की दिव्य छटा, 1100 लीटर खीर का लगेगा भोग

मथुरा। चंद्र सरोवर के घाटों पर 5100 दीपों की रोशनी, चांदनी में झिलमिलाता जल और भगवान रास बिहारी को 1100 लीटर दूध से तैयार खीर का भोग। शरद पूर्णिमा पर गोवर्धन के परासौली स्थित ऐतिहासिक महारास स्थली में भक्ति और आस्था का ऐसा ही भव्य नजारा देखने को मिलेगा। 25 अक्टूबर को होने वाले आयोजन में दीपों की जगमगाहट के बीच श्रद्धालु राधा-कृष्ण की दिव्य महारास लीला की स्मृतियों से जुड़ेंगे। वहीं, गोवर्धन के प्रमुख मंदिरों में भी विशेष श्रृंगार और खीर भोग की तैयारियां की जा रही हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में भगवान श्रीकृष्ण ने मुरली की मधुर तान पर गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसे राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, समर्पण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। परासौली स्थित चंद्र सरोवर इसी पौराणिक प्रसंग से जुड़ी आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां हर वर्ष शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालु विशेष आयोजन में शामिल होते हैं।महारास स्थली के उपासक भागवत किंकर गोपाल प्रसाद उपाध्याय के अनुसार, धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मान्यता के मुताबिक, भगवान की महारास लीला को निहारने में चंद्रदेव छह महीने तक तल्लीन रहे थे। मान्यता है कि चंद्रदेव के द्रवित रस से चंद्र सरोवर का निर्माण हुआ। उन्होंने बताया कि वराह पुराण में परासौली का उल्लेख परस्पर वन के रूप में मिलता है, जबकि गर्ग संहिता में चंद्र सरोवर की महिमा का वर्णन है। महाप्रभु वल्लभाचार्य की परंपरा में भी इस स्थल का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।आन्यौर निवासी ओमप्रकाश कौशिक ने बताया कि सरोवर के घाटों और महारास स्थली पर 5100 दीप जलाए जाएंगे। भगवान रास बिहारी को सफेद वस्त्र धारण कराकर 1100 लीटर दूध से तैयार खीर का भोग अर्पित किया जाएगा। उधर, मुकुट मुखारविंद मंदिर के रिसीवर अमित गोस्वामी के अनुसार, भगवान को धवल वस्त्रों में मुरली के साथ दर्शन कराए जाएंगे। दानघाटी मंदिर के सेवायत दिनेश बाबा और जतीपुरा मुखारविंद मंदिर के महेश शर्मा ने भी विशेष श्रृंगार और खीर भोग की जानकारी दी। शरद पूर्णिमा पर चंद्र सरोवर से लेकर गिरिराजजी के मंदिरों तक भक्ति और परंपरा का उल्लास छाएगा।

 

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