मुरैना ।चंबल अंचल में बढ़ते बीहड़ों और घटती उपजाऊ भूमि के कारण प्रभावित किसानों एवं ग्रामीणों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय औषधीय पौधों का संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन उपयोगी विकल्प बन सकता है। वर्ष 2012 के सर्वेक्षण के अनुसार, मुरैना जिले में लगभग 35 हजार हेक्टेयर भूमि बीहड़ में परिवर्तित हो गई थी।

चंबल क्षेत्र में गुग्गल, शतावरी, गिलोय, गोखरू, अश्वगंधा, आंवला, भुई आंवला, अर्जुन, बेल एवं अन्य औषधीय प्रजातियों की उपलब्धता स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा कर सकती है।


इसके लिए ब्लॉक स्तर पर संग्रहण केंद्र स्थापित करने, भंडारण की व्यवस्था करने तथा औषधीय पौधों से कच्चा माल प्राप्त करने वाली कंपनियों से बाजार संपर्क विकसित करने की आवश्यकता है। वन विभाग, कृषि विभाग, जिला पंचायत, औषधीय पादप बोर्ड, कृषि विश्वविद्यालय एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से इस दिशा में कार्य किया जा सकता है।

इस पहल से बीहड़ भूमि का उपयोग, स्थानीय वन संपदा का संरक्षण, ग्रामीणों की आजीविका में वृद्धि और पलायन रोकने में मदद मिल सकती है। साथ ही, बीहड़ क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण एवं भूमि के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
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