वृंदावन।यमुना किनारे कुंभ क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ की भक्ति का अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है। नेपाल और श्रीलंका की यात्रा के बाद महाप्रभु जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा,भाई बलभद्र और चक्रराज सुदर्शन के साथ वृंदावन पहुंचे हैं। यहां विरजा मंडप में भगवान का दिव्य दरबार सजा है, जहां दर्शन,कथा और भजन-कीर्तन में श्रद्धालु भक्ति के रंग में सराबोर हो रहे हैं।विशेष बात यह है कि भगवान का प्रवास पांच दिन से बढ़ाकर सात दिन कर दिया गया है।हरियाली से घिरे विरजा मंडप में भगवान के दर्शन के लिए दिल्ली, बेंगलुरु समेत देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भगवान के भव्य डोले के साथ करीब 500 भक्तों का दल धार्मिक यात्रा में शामिल है। यात्रा के माध्यम से महाप्रभु की महिमा का प्रचार करने के साथ विश्व में शांति, सद्भाव और मैत्री का संदेश दिया जा रहा है।संत सत्यानंद महाराज ने बताया कि विरजा मंडप में स्कंद पुराण में वर्णित भगवान जगन्नाथ की महिमा पर कथा आयोजित की जा रही है। संत सत्यानंद महाराज, दीनबंधु महाराज, परमानंद महाराज और बाबा दयानिधि दास श्रद्धालुओं को भगवान की लीलाओं से परिचित करा रहे हैं। यहां सुबह छह से साढ़े आठ बजे तक और शाम छह से रात नौ बजे तक कथा, दर्शन और भक्ति का क्रम चल रहा है।दीनबंधु दास महाराज के अनुसार, भगवान जगन्नाथ के विभिन्न दिव्य वेशों के दर्शन इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण हैं। राजराजेश्वर वेश में स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित महाप्रभु के साथ गजानन, राधा-दामोदर, त्रिविक्रम, लक्ष्मी-नारायण, नृसिंह, वनभोजी, कालियादलन, कृष्ण-बलराम, रघुनाथ और पद्म वेशों की परंपरा भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।ओडिशा की पारंपरिक सेवा-पद्धति और पूजन विधान के अनुरूप हो रही आराधना ब्रज में पुरी की धार्मिक परंपराओं का सजीव अनुभव करा रही है।





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