21 अक्टूबर, 2026  |  23:10 IST
Jila Nazar
बुधवार, 21 अक्टूबर 2026
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सदर में 60 फिट रावण के पुतले का हुआ दहन, राम की हुई जय जयकार

कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने किया रामलीला का उद्घाटन

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सदर में 60 फिट रावण के पुतले का हुआ दहन, राम की हुई जय जयकार

 मथुरा  । श्री सदर बाजार रामलीला कमेटी के तत्वाधान में दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया गया । आज रामलीला का उद्घाटन धनुष पर तीर चढ़ाकर उ प्र सरकार के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने रूप से किया किया । इसके उपरांत लीला मंचन के दौरान मेघनाथ वध,अहिरावण वध, रावण वध और भगवान श्रीराम का माता in सीता से पुर्नमिलन की लीला दिखाई गई। मेधनाथ और लक्ष्मण के बीच घनघोर युद्ध होता है। इसके बाद मेघनाथ का वध होता है तो रावण दुखी हो जाता है। इसके बाद रावण कुल के अंतिम योद्धा अपने पुत्र और पाताल लोक के राजा अहिरावण के पास जाता है। रावण के आह्वान पर पाताल लोक से आये अहिरावण ने छल और कपट के साथ विभीषण का वेश धारण कर सोते हुए राम और लक्ष्मण को मायावी स्वरूप में अपहृत कर लिया। इस प्रकार अपहृत राम और लक्ष्मण को लेकर अहिरावण पाताल लोक पहुंचा। इधर निद्रा से जागने के पश्चात हनुमान ने जब अपने प्रभु राम और लक्ष्मण को नहीं पाया तो उन्होंने विभीषण से प्रभु राम और लक्ष्मण विश्राम के विषय में जानकारी प्राप्त की। संतोषजनक उत्तर न होने पर हनुमान जी के क्रोध में विभीषण को सजा भी देने का मन बनाया। तभी विभीषण ने कहा कि मेरा स्वरूप सिर्फ अहिरावण भर सकता है। वही प्रभु राम और लक्ष्मण को उठाकर पाताल लोक ले गया होगा।उसका पता जानकर हनुमान सीधे पाताल लोक पहुंचे। जहां उन्होंने एक ही मुस्टिक के प्रहार से अहिरावण को धराशाई कर दिया। इस प्रकार हनुमान ने अहिरावण का वध कर राम और लक्ष्मण के जीवन की रक्षा की। मेघनाथ और अहिरावण के वध के पश्चात रावण के अकेला होने पर वह भारी क्रोध में रामा दल पर टूट पड़ा। जहां राम और रावण का घनघोर युद्ध हुआ। इसी दौरान हनुमान ने रावण से पराक्रम का पैमाना तय करने का निर्णय किया और हनुमान जी और रावण में युद्ध होता है । राम और रावण युद्ध काफी देर तक चला। राम रावण के कई शीश काट कर डालते रहे और रावण के शीश फिर से निकल आते रहे। तभी विभीषण ने आकर राम को बताया कि रावण की नाभी में अमृत है। जिसे सुनकर रावण और को क्रोध आता है वह विभिषण को मारने को दौड़ा। तभी राम ने रावण की नाभी के अमृत को अपने वाण से सुखा दिया। इस प्रकार रावण राम के हाथों मारा गया। अंतिम समय में रावण अपने मन को साफ करते हुए धर्म की ओर चलने का संदेश दिया। राम ने रावण का मन पवित्र होते देख शिष्टाचार का वास्ता देकर लक्ष्मण को रावण के चरणों के पास भेजा। तभी रावण ने कहा कि मैंने अपने भाई को तिरस्कार करके निकाल दिया और तुम राम के भाई होकर उनके साथ थे। क्योंकि राम का भाई राम के साथ था, इसलिए राम की विजय हुई। रावण ने उपदेश दिया कि कभी लालच, क्रोध, बैर किसी ने न रखो। नीति और ज्ञान के अनुसार राज्य का संचालन करना चाहिए।इस दौरान कमेटी अध्यक्ष अलका उपमन्यु एडवोकेट ,पूर्व पार्षद रवि यादव, केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला यादव, पार्षद विष्णु सैनी, भोले यादव,अनिल अग्रवाल,नरेन्द्र भारद्वाज,बांकेलाल शर्मा, विनोद यादव, नवनीत सरन सक्सैना, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष घनश्याम लोधी, कैबिनेट मंत्री प्रतिनिधि मनोज फौजदार, रविंद्र भारद्वाज, गुंजन खत्री, राजवीर चौधरी, भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष प्रतिमा सिंह, डा एस पी एस चौहान, दीपक यादव, हरेश शर्मा, दीपक शर्मा, मोहन मीणा, बार एसोसिएशन अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह, सचिव मनोज शर्मा, विप्र नेता गौरव शर्मा आदि शामिल रहे

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