अरे ओ भइया! जरा कान खोलकर सुनना और दिल थामकर बैठना! सेंटी गुरु आज ऐसी खबर की गठरी लेकर आए हैं, जिसमें नकाब भी है, रस्सी भी है, पचास लाख की चर्चा भी है और सुरक्षा के दावों पर उठता सवाल भी! मामला कानपुर का बताया जा रहा है, जहां बीजेपी पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश मंत्री रमेश यादव के फार्म हाउस में नकाबपोश बदमाशों ने कथित तौर पर धावा बोल दिया। खबर है कि नेताजी को बंधक बनाकर हाथ-पैर बांध दिए और करीब 50 लाख रुपये की नकदी व सामान लेकर चंपत हो गए।
अब गुरु की समझ में एक बात नहीं आ रही! राजनीति में बड़े-बड़े मंच, लंबे-चौड़े भाषण, सुरक्षा के दावे और रसूख का रुतबा तो खूब दिखाई देता है, मगर जब आधी रात को बदमाश दरवाजे पर दस्तक दें, तब सारे दावे किस अलमारी में बंद हो जाते हैं? नेताजी के हाथ रस्सी से बंधे थे या नहीं, इसकी जांच पुलिस करेगी; लेकिन इस घटना ने सुरक्षा के भरोसे को सवालों में जरूर बांध दिया है।
सेंटी गुरु बोले भइया, अपराधी जब वारदात करता है, तो वह पहले किसी का पदनाम पढ़कर अनुमति नहीं लेता! उसे न कुर्सी से मतलब, न पार्टी के झंडे से और न ही भाषणों में किए गए वादों से। उसकी नजर तो मौके और माल पर होती है। यही वजह है कि कानून-व्यवस्था की असली परीक्षा मंचों पर नहीं, बल्कि गलियों, सड़कों और घरों के दरवाजों पर होती ह।
घटना की सूचना पर जॉइंट पुलिस कमिश्नर डॉ. विपिन ताडा और डीसीपी दीपेंद्रनाथ चौधरी के मौके पर पहुंचने की जानकारी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी बताई जा रही है। फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
सेंटी गुरु ने आखिर में चश्मा उतारकर कहा साहब! जनता को बयान नहीं, भरोसा चाहिए; दावों की माला नहीं, सुरक्षा का कवच चाहिए। क्योंकि जब रसूखदार के फार्म हाउस तक अपराध की आहट पहुंच जाए, तो आम आदमी की चिंता को हल्के में कैसे लिया जाए?
कुर्सी कितनी भी ऊंची हो, सुरक्षा में छेद हो तो डर सबके दरवाजे तक पहुंचता है!
सेंटी गुरु


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