22 अक्टूबर, 2026  |  23:46 IST
Jila Nazar
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026
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राधाकुंड में कार्तिक मास का उल्लास, धर्मशालाएं फुल; घरों में ठहरे देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु

22 अक्टूबर से शुरू हुई एक माह की नियम सेवा, मंगला आरती से हरिनाम संकीर्तन तक भक्ति में डूबेगा राधाकुंड-श्यामकुंड

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राधाकुंड में कार्तिक मास का उल्लास, धर्मशालाएं फुल; घरों में ठहरे देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु

मथुरा। राधाकुंड में कार्तिक मास की नियम सेवा को लेकर श्रद्धा का सैलाब उमड़ने लगा है। गेस्ट हाउस और धर्मशालाएं भरने के बाद अब कई तीर्थयात्रियों को ब्रजवासियों के घरों में ठहरना पड़ रहा है। राधाकुंड-श्यामकुंड की गलियों से लेकर घाटों और परिक्रमा मार्ग तक भक्ति की छटा बिखरने लगी है। गुरुवार, 22 अक्टूबर से शुरू हो रही एक माह की नियम सेवा में देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से आए हजारों श्रद्धालु स्नान, परिक्रमा, जप और संकीर्तन के माध्यम से राधारानी की आराधना करेंगे।कार्तिक मास के धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर मंदिरों और घाटों पर तैयारियां तेज हो गई हैं। कहीं रंगोली सजाई जा रही है तो कहीं फूलों की कलियों से आकर्षक द्वार बनाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की दिनचर्या भोर चार बजे मंदिरों में मंगला आरती के दर्शन से शुरू होगी। इसके बाद कुंड स्नान, परिक्रमा, जप और भजन-साधना का क्रम चलेगा। शाम को मंदिरों में श्रीमद्भागवत कथा और संतों के प्रवचन होंगे। अधिवास कीर्तन के साथ नियम सेवा का शुभारंभ किया जाएगा।बंगाल, ओडिशा, असम, मणिपुर, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों से भक्त पहुंच रहे हैं। विदेशी श्रद्धालु भी पूरे महीने यहां रहकर साधना करेंगे। राधा-कालाचांद मंदिर, महाप्रभुजी मंदिर, घाट वाले राधा-गोपीनाथ मंदिर, राधा-गोविंद देव मंदिर और जगन्नाथ देव मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर आयोजन होंगे। कई मंदिरों में अखंड नाम संकीर्तन की तैयारी है।पंडित जगन्नाथ के अनुसार, कार्तिक मास में भजन, जप, तप और व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। वहीं, राधावल्लभ ने बताया कि श्रद्धालु हर वर्ष परिक्रमा मार्ग की सजावट में सेवा देते हैं। इस बार भी भक्त उत्साह के साथ व्यवस्थाओं में जुटे हैं।

 

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