अरे भइया! जरा संभलकर बैठिए, क्योंकि लखनऊ की सियासत में पोस्टर का ऐसा पावरफुल धमाका हुआ है कि तस्वीरें भारतीय हैं, विवाद देशी है और नामों की फेहरिस्त में एलन मस्क भी विदेशी मेहमान बनकर पहुंच गए! अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और अखिलेश यादव की तस्वीरों के साथ मस्क का नाम जोड़कर आखिर संदेश क्या देना है, यह पोस्टर बनाने वाले ही बेहतर बता सकते हैं। मगर सेंटी गुरु को इसमें राजनीति का नया फॉर्मूला जरूर दिखाई दे रहा है मुद्दा जितना उलझा हुआ, पोस्टर उतना चर्चित!
अब देखिए जनाब! राजनीति में कामकाज का हिसाब मांगिए तो फाइलें खुलती हैं, विकास का सवाल उठाइए तो आंकड़े निकलते हैं, लेकिन पोस्टर लगा दीजिए तो बहस अपने आप चल पड़ती है। न प्रेस कॉन्फ्रेंस की जरूरत, न लंबा भाषण और न ही सवालों के जवाब देने की मजबूरी। बस कुछ चेहरे, एक विवादित संदेश और फिर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का ऐसा रेला कि हर कोई अपने-अपने चश्मे से सियासत का रंग देखने लगता है।

सेंटी गुरु पूछते हैं भाई, पोस्टर में किसी की तस्वीर लगा देने से क्या उसके सारे विचार, कर्म और संबंध भी एक ही रंग में रंग जाते हैं? लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन सवाल का जवाब तर्क से मिले तो बेहतर, केवल तस्वीरों के सहारे फैसला सुनाना कहां तक उचित है?
और एलन मस्क का नाम इस भारतीय सियासी पोस्टर में देखकर तो लगता है कि हमारी राजनीति अब ग्लोबल हो रही है। दुनिया रॉकेट से मंगल तक पहुंचने की तैयारी करे, इधर पोस्टरबाज एक तस्वीर से दूसरे खेमे तक पहुंचने का शॉर्टकट खोज रहे हैं!
लखनऊ वालों, पोस्टर जरूर देखिए, बहस भी कीजिए; मगर याद रखिए लोकतंत्र तस्वीरों से नहीं, तथ्यों और जवाबदेही से मजबूत होता है। वरना नेता काम से नहीं, पोस्टर के आकार और विरोधियों के अवतार से ही महान घोषित होने लगेंगे!
- सेंटी गुरु




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