आगरा। नगर निगम की ई-टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चाओं में संभावित गड़बड़ी का दायरा 100 से 200 करोड़ रुपये तक बताए जाने का दावा किया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
आरोपों के केंद्र में एक आउटसोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका, टेंडर की दरों में कथित बदलाव और कुछ ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने की आशंका शामिल है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे सरकारी राजस्व और ई-टेंडर प्रणाली की पारदर्शिता प्रभावित होने का मामला सामने आ सकता है।
वहीं, संबंधित कर्मचारी की कथित संपत्ति, आय के स्रोतों और पटल परिवर्तन को लेकर भी चर्चाएं हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। केवल रहन-सहन या संपत्ति संबंधी चर्चाओं के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए मूल ई-टेंडर दस्तावेजों, डिजिटल लॉग, समय-मुद्रित रिकॉर्ड, स्वीकृति संबंधी फाइलों और वित्तीय लेन-देन का स्वतंत्र ऑडिट जरूरी है। साथ ही संबंधित कर्मचारियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल कथित घोटाले की रकम और अनियमितताओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। निष्पक्ष जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी और जिम्मेदारी तय हो पाएगी।





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