14 अक्टूबर, 2026  |  08:07 IST
Jila Nazar
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
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एक थाली का खाना, पांच जिंदगियां संकट में!

सन्त कुमार भारद्वाज

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एक थाली का खाना, पांच जिंदगियां संकट में!

आगरा के किरावली में एक ही परिवार के पांच सदस्यों का खाना खाने के बाद अचेत अवस्था में मिलना और पांच वर्षीय मासूम जीशान उर्फ गोलू की मौत हो जाना बेहद दुखद और चिंताजनक घटना है। परिवार के चार अन्य सदस्यों की गंभीर हालत के चलते जयपुर रेफर किए जाने की खबर ने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर दिया है। प्रथम दृष्टया फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि भोजन की सुरक्षा, घरेलू सतर्कता और स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस भोजन से शरीर को ऊर्जा और जीवन मिलना चाहिए, वही यदि बीमारी या मौत की वजह बन जाए तो चिंता स्वाभाविक है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी खाद्य पदार्थ को दोषी ठहराना या घटना का कारण तय करना उचित नहीं होगा।

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पांच वर्ष की उम्र में जीशान को अभी जीवन की दुनिया समझनी थी। उसके सपनों ने आकार भी नहीं लिया था कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक बच्चे की मौत का दर्द शब्दों में समेटना कठिन है। साथ ही, गंभीर अवस्था में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे परिवार के चार सदस्यों के स्वस्थ होने की कामना हर किसी के मन में है।

ऐसी घटनाओं के बाद केवल शोक जताना पर्याप्त नहीं। जरूरी है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। भोजन के नमूनों की जांच, उपलब्ध चिकित्सकीय साक्ष्यों का परीक्षण और घटना की परिस्थितियों की पड़ताल से ही वास्तविक वजह सामने आ सकती है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जवाबदेही तय होनी चाहिए।

घरेलू स्तर पर भोजन की स्वच्छता, सुरक्षित पानी, खाद्य पदार्थों का उचित भंडारण और बासी भोजन के प्रति सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण हैं। भोजन के बाद एक साथ कई लोगों की तबीयत बिगड़ना गंभीर संकेत है। ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खों में समय गंवाने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

किरावली की यह घटना याद दिलाती है कि खाद्य सुरक्षा महज नियम-कानून का विषय नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा से जुड़ा सवाल है। प्रशासन जांच करे, विशेषज्ञ कारण स्पष्ट करें और समाज जागरूक बने

 ताकि किसी दूसरे घर में भोजन के बाद मातम न छाए। जीशान की मौत का दुख तभी सार्थक चेतावनी बनेगा, जब उससे सबक लेकर भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के ठोस प्रयास किए जाएंगे।

 सन्त कुमार भारद्वाज

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