21 अक्टूबर, 2026  |  09:28 IST
Jila Nazar
बुधवार, 21 अक्टूबर 2026
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आतंकवाद पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा

आतंकियों को पनाह देने वालों की भी जवाबदेही तय हो: राजनाथ सिंह

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आतंकवाद पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा

दुशांबे/एजेंसी। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के मुद्दे पर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को सामूहिक और दृढ़ संकल्प के साथ ध्वस्त करना जरूरी है। आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता और इससे निपटने में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड की गुंजाइश नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को शांति, सुरक्षा और विकास के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल निर्दोष लोगों की जान नहीं लेता, बल्कि समाज में कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है और युवाओं को उन अवसरों से वंचित करता है, जिनके वे हकदार हैं।

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रक्षामंत्री ने जोर देकर कहा कि आतंकवादियों को आर्थिक मदद देने, उनका समर्थन करने या उन्हें शरण देने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान को आतंकवाद के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग और जवाबदेही की जरूरत पर भारत के स्पष्ट रुख के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के दौरान पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी सदस्य देशों का साझा दायित्व है। आतंकवाद के नेटवर्क को समाप्त करने के लिए देशों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर सहयोग करना होगा। केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें मिलने वाली आर्थिक सहायता, संरक्षण और अन्य संसाधनों के स्रोतों पर भी प्रभावी प्रहार जरूरी है।

बैठक में आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, संपर्क व्यवस्था और तकनीक के इस्तेमाल जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। राजनाथ सिंह ने कहा कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहभागिता समावेशी होनी चाहिए, ताकि सभी देशों को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण, व्यापारिक बाधाओं को कम करनेवाले और निवेश को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया।

एससीओ की बैठक में भारत का संदेश स्पष्ट रहा कि क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए आतंकवाद के खिलाफ एकजुट प्रयास जरूरी हैं। आतंकवाद के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी या चुनिंदा दृष्टिकोण सामूहिक सुरक्षा के उद्देश्य को कमजोर कर सकता है। भारत ने सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ ठोस सहयोग और साझा जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा जताई।

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