25 अक्टूबर, 2026  |  00:55 IST
Jila Nazar
रविवार, 25 अक्टूबर 2026
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अलीगढ़ में सजा साहित्य का महाकुंभ, बाल प्रतिभाओं को मिला सम्मान

धर्मपुर कोर्टयार्ड में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन, देशभर के कवियों ने रचनाओं से बांधा समां

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अलीगढ़ में सजा साहित्य का महाकुंभ, बाल प्रतिभाओं को मिला सम्मान

अलीगढ़। साहित्य, संवेदना और काव्य की त्रिवेणी उस समय देखने को मिली, जब धर्मपुर कोर्टयार्ड में सनाथ साहित्यिक एवं जनकल्याण संस्था तथा बातें अनकही फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में विराट कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इस साहित्यिक महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिष्ठित कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में साहित्य की नई पौध को प्रोत्साहित करने की अनूठी पहल भी आकर्षण का केंद्र रही।

बाल प्रतिभाओं को मिला प्रोत्साहन

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कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि पूर्व में आयोजित बाल काव्य प्रतियोगिता के प्रतिभागियों का सम्मान एवं पुरस्कार वितरण रहा। प्रतिभाशाली बच्चों को प्रथम पुरस्कार के रूप में 11 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 5,100 रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 2,100 रुपये प्रदान किए गए। इस पहल ने बच्चों में साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को निखारने का संदेश दिया। आयोजकों की इस कोशिश को साहित्य के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम माना गया।

दिग्गज कवियों ने सजाई काव्य-संध्या

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता गुरुदेव नरेंद्र शर्मा ‘नरेंद्र’ ने की। कार्यक्रम में जोनी फास्टर, वरिष्ठ कवि अशोक अंजुम, अमिताभ शर्मा, मनोज चौहान, मनोज नागर, अजय मिश्रा और पंकज भारद्वाज सहित अनेक प्रतिष्ठित रचनाकारों ने काव्य-पाठ किया। कवियों की विविध विषयों पर आधारित रचनाओं ने श्रोताओं को साहित्य के अलग-अलग रंगों से परिचित कराया।

इस अवसर पर प्रदीप चौहान ने भी अपनी काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं। श्रोताओं से मिली सराहना और स्नेह ने काव्य-संध्या को और यादगार बना दिया।

सफल आयोजन के लिए टीम की सराहना

कार्यक्रम का कुशल संचालन सुधांशु गोस्वामी ने किया। आयोजन में आत्मीय स्वागत और जलपान की बेहतर व्यवस्था भी आकर्षण का हिस्सा रही। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. दौलत राम शर्मा, धनंजय भारद्वाज, आशीष ठाकुर तथा उनकी पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

यह कवि सम्मेलन केवल कविता और काव्य-पाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नई प्रतिभाओं को मंच देने, बच्चों में साहित्यिक संस्कार विकसित करने और समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने का संदेश भी दे गया। साहित्यप्रेमियों ने ऐसे आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि साहित्य की ज्योति नई पीढ़ी तक पहुंचती रहे।

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