जावेद अख्तर के धर्म और आस्था पर विचार फिर चर्चा में हैं। एक्सप्रेस हिंदी से बातचीत में उन्होंने कहा कि इंसान प्रायः उसी मजहब को मानता है जिसमें उसका जन्म हुआ हो, और सवाल उठाया कि क्या यह वाकई उसकी अपनी सोच व पसंद है।
उनके मुताबिक किसी विश्वास से जो सुकून मिलता है, उसे उस बात की सच्चाई का सबूत नहीं माना जा सकता। यह उनका निजी दृष्टिकोण है।



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