शमसाबाद। श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर स्थित रामलीला स्थल पर भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। रावण जन्म से लेकर भगवान श्रीराम के प्राकट्य तक की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। रामजन्म का प्रसंग आते ही पूरा परिसर ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष, मंगलगीतों और बधाइयों से गूंज उठा।
श्रीराम जन्मोत्सव के अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक बधाई गीत गाए, वहीं श्रद्धालुओं ने नृत्य कर खुशियां मनाईं। क्षेत्र के अनेक परिवार अपने बच्चों को भगवान श्रीराम के स्वरूप में सजाकर लेकर पहुंचे। पीतांबर, मुकुट और धनुष-बाण धारण किए नन्हे रामस्वरूप आकर्षण का केंद्र बने रहे। मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बच्चों को उपहार वितरित कर उनका उत्साह बढ़ाया।
लीला में रावण जन्म, महाराज दशरथ के यज्ञ और चारों राजकुमारों के जन्म के प्रसंगों का मंचन हुआ। आयोजन ने धर्म, सत्य और मर्यादा का संदेश दिया।
श्री मनःकामेश्वर मठ मंदिर के महंत योगेश पुरी ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, करुणा, कर्तव्य और मर्यादा का आदर्श है। उनका चरित्र हर युग में समाज को सही दिशा दिखाता है।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने कहा कि रामलीला महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने का माध्यम है।





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