बहराइच के मिर्जापुर गांव के युवा किसान त्रिलोकी ने केले की खेती के साथ सह-फसली मॉडल अपनाया है। केले के बीच की खाली जमीन में वे तिल, शिमला मिर्च और धनिया लगाकर अतिरिक्त आमदनी ले रहे हैं।
आमतौर पर हरी खाद के लिए ढैंचा बोया जाता है, पर त्रिलोकी के अनुसार उसे मिट्टी में गलने में ज्यादा समय लगता है। एक हफ्ते में शिमला मिर्च की रोपाई करनी थी, इसलिए उन्होंने तिल बोया। हरी तिल को जोतकर मिलाने से मिट्टी को पोषण मिलता है, और पकने देने पर तिल व उसका तेल बाजार में अच्छे दाम पर बिकता है।



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