आगरा। उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने नकली दवाओं और सरकारी सप्लाई की दवाओं की री-लेबलिंग करने वाले बड़े सिंडिकेट पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है।
जांच में खुलासा हुआ कि सरकारी अस्पतालों की दवाओं पर नए एमआरपी स्टिकर लगाकर उन्हें खुले बाजार में बेचा जा रहा था। कार्रवाई के दौरान 58 थोक दवा लाइसेंस रद्द या निलंबित, 9 एफआईआर दर्ज और करीब 3.63 करोड़ रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त की गई हैं।
एफएसडीए की टीम ने शहर की 13 दवा फर्मों पर एक साथ छापेमारी कर दो प्रतिष्ठान सील किए, जबकि कई अन्य की बिक्री पर रोक लगा दी। जांच में फर्जी बिल, बिना कोल्ड-चेन रखी इंसुलिन और री-लेबलिंग के सबूत भी मिले। एसटीएफ ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
एफएसडीए आयुक्त रोशन जैकब ने कहा कि पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है और नकली दवाओं के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।




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