11 अक्टूबर, 2026  |  17:49 IST
Jila Nazar
रविवार, 11 अक्टूबर 2026
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कल्पना कीजिए: अगर 27 के चुनाव में तीसरी बार योगी, और 29 के चुनाव में चौथी बार मोदी आ गए तो क्या होगा?

ये न तो कोई भविष्‍यवाणी है, और न ऐसी कोई ठोस सूचना है। सूरते-हाल के मद्देनजर बस एक आशंका है। अब इस आशंका को देखते हुए जरा कल्पना लोक में उतरकर देखिए। विचार कीजिए कि अगर 27 के चुनाव में तीसरी बार योगी…

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कल्पना कीजिए: अगर 27 के चुनाव में तीसरी बार योगी, और 29 के चुनाव में चौथी बार मोदी आ गए तो क्या होगा?

ये न तो कोई भविष्‍यवाणी है, और न ऐसी कोई ठोस सूचना है। सूरते-हाल के मद्देनजर बस एक आशंका है। अब इस आशंका को देखते हुए जरा कल्पना लोक में उतरकर देखिए। विचार कीजिए कि अगर 27 के चुनाव में तीसरी बार योगी, और 29 के चुनाव में चौथी बार मोदी आ गए तो क्या होगा? 

कुछ लोगों के लिए कितनी भयावह हो सकती है ये घटना, इसका अंदाज भी लगाना मुश्किल है। अचानक देश में खुदकुशी का आंकड़ा आसमान छू सकता है। खुदकुशी के नित नए तरीके देखने को मिल सकते हैं। कोई अपने बाल नोंच कर जान देने पर आमादा हो सकता है, तो कोई सिर को दीवार पर पटक-पटक कर मरने की प्रक्रिया में लिप्त हो सकता है। 

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इस सबमें घोर आश्चर्य की बात यह दिखाई दे सकती है कि ऐसा करने वाले अधिकांश "नेता" हो सकते हैं। कोई पूर्व मंत्री, कोई पूर्व मुख्‍यमंत्री, कोई दर्जा प्राप्‍त मंत्री, और कोई किसी पार्टी का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष। होंगे तो सामान्य राजनेता भी, किंतु वो जान न देकर अपने आकाओं की खातिर जान लेने को आतुर नजर आएंगे। 

इसके अलावा "नीम पागलों" की संख्‍या में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है। सड़कों पर घूमने वाले नीम पागल, आवारा पशुओं की तरह आमजन की परेशानी का कारण बन सकते हैं। इनमें पायी जाने वाली "स्‍व घोषित विशिष्‍टजन" होने की प्रवृत्ति चूंकि खतरनाक होगी, इसलिए यह अकारण सबसे "सिर फुटव्वल" करने को तैयार होंगे। कहीं भी धरने पर बैठ जाएंगे, कहीं भी प्रदर्शन करने लगेंगे। किसी का भी इस्तीफा मांगेंगे। "लोकतंत्र और संविधान" इनके लिए स्‍थायी रूप से खतरे में होगा। 

आप कह सकते हैं कि आज के हालात भी तो ऐसे ही हैं। फिर नया क्या होगा। नहीं भाई, अभी तो फिर भी काफी हद तक इनकी मानसिक स्थिति नियंत्रण में है। उस समय स्थिति भयावह होगी क्योंकि "योगी-मोदी" इनके दिलो-दिमाग पर साए की तरह छा चुके होंगे। 

रेबीज वाले कुत्ते के काटने पर इंसान जिस तरह की हरकतें करता है, वैसी ये नेता आम रास्तों पर करने को बाध्य होंगे। सड़क पर योगी-मोदी की तस्वीर देखकर ही ये नेता उहें काटने को दौड़ेंगे। कोई कह रहा होगा कि राजघाट चलो, अब बापू ही योगी-मोदी को हटा सकते हैं। कोई "Zen G and Zen Alpha" के फेर में पड़ा होगा, तो कोई अपने लिए नई जुगत भिड़ा रहा होगा। और हां, ये "Zen G and Zen Alpha"  इन्हें पत्थर मार-मारकर चिढ़ा रहे होंगे। वो इनके नाम के आगे "पीएम और सीएम" जोड़कर इन्‍हें दौड़ाते दिखाई देंगे। 

बहुत पहले कभी का एक किस्‍सा बहुत मशहूर है। किस्सा कुछ यूं है कि एक पीएम किसी पागलखाने का दौरा करने गया। पागल खाने में उसे एक व्यक्‍ति कुछ ठीक-ठाक नजर आया तो पीएम ने उससे बात करने की सोची। 

पीएम ने उससे पूछा, भाई तुम यहां कैसे आए और यहां आने से पहले क्या करते थे। पीएम के सवाल का जवाब देने की बजाय उसने पीएम से ही सवाल कर डाला। कहने लगा- पहले आप अपना परिचय दीजिए "चाचा", फिर मैं आपको आपके सारे प्रश्‍नों का उत्तर दूंगा। पीएम ने उसे बताया कि मैं "देश का प्रधानमंत्री" हूं। अब तुम बताओ। 

यह सुनकर वह व्यक्‍ति जोर-जोर से हंसने लगा और फिर बोला, यहां आने से पहले मैं भी अपना परिचय यही कहकर दिया करता था। आओ दोस्त, हमारी दुनिया में आपका स्वागत है। 

कुल मिलाकर कहने का मतलब यही है कि अगर "योगी और मोदी" अगले चुनाव में जीत गए तो हालात बड़े 'अप्रत्‍याशित" होंगे। बेहतर होगा कि "हम और आप" इसके लिए अपने आपको मानसिक रूप से तैयार कर लें अन्यथा बेरोजगार नेता, आवारा पशुओं से अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं।

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