कोलकाता। पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार ने दो बड़े कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने गुंडागर्दी, हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी समाज विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए नए एंटी-गुंडा कानून की तैयारी की है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार ऐसे मामलों में आरोपियों को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकेगा। साथ ही सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए एक विशेष आयोग का गठन भी किया जाएगा।
दूसरी ओर, राज्य में यूसीसी लागू करने की दिशा में भी प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रस्तावित कानून के मसौदे की समीक्षा और उसे अंतिम रूप देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। सरकार की योजना इस मसौदे को विधानसभा के अगस्त सत्र में पेश करने की है।
प्रस्ताव के अनुसार आदिवासी समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने का सुझाव दिया गया है। इन दोनों फैसलों को राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




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