लेखक बद्री नारायण के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे कर रहा है, इसलिए यह साल संघ पर बौद्धिक चर्चा का रहेगा। उनका मानना है कि मोहन भागवत के हाल के विचार संघ और समाज दोनों को प्रभावित करेंगे।
लेख में कहा गया है कि भागवत संघर्षविहीन भारत और विश्व के लिए बार-बार हस्तक्षेप कर रहे हैं। लेखक का मत है कि यूक्रेन-रूस और पश्चिम एशिया जैसे टकरावों के दौर में भारतीय विचार प्रकाश स्तंभ बन सकता है और संघ की भूमिका बढ़ रही है।
लेखक के अनुसार भागवत हिंदू मन के ऐतिहासिक घावों को भरने के साथ मुस्लिम समुदाय को भी मिल-जुलकर रहने का संदेश दे रहे हैं। वे ‘हर मस्जिद में मंदिर’ खोजने की प्रवृत्ति से समाज को बचाने की बात भी करते हैं।
लेख यह भी मानता है कि कुछ लोग भागवत की आलोचना करते हैं, पर वे आलोचकों की बात सुनते हैं। लेखक सभी पंथों से संघ प्रमुख के विचारों पर गौर करने का आग्रह करते हैं।



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