पुस्तक समीक्षा में राजेश विक्रांत लिखते हैं कि किसी साहित्यकार की रचनाओं का समग्र तैयार करना श्रमसाध्य काम है। राघवचेतन राय ने कविता, कहानी, साक्षात्कार, वैचारिक लेख, संपादकीय और अनुवाद जैसी कई विधाओं में लिखा था।
समीक्षा के अनुसार इन सबको संकलित करने का काम उनकी जीवनसंगिनी और साहित्यकार कुसुमलता सिंह ने किया। श्रीधर मिश्र ने इसका संपादन किया और लिटिल बर्ड पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली ने इसे छापा है। ग्रंथ नौ खंडों में बंटा है।
पहले खंड में तीन कविता संग्रहों की 115 कविताएं हैं। इसके बाद कहानियां, लेख, पत्रिकाओं के संपादकीय, साक्षात्कार, अनुवाद और फुटकर रचनाओं व पत्रों के खंड आते हैं।
समीक्षा में राय का परिचय भी दिया गया है। वे भारतीय राजस्व सेवा में चुने गए थे और 2006 में मुख्य आयकर आयुक्त, दिल्ली के पद से सेवानिवृत्त हुए। समीक्षक के अनुसार कविता उनका जुनून थी।




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