नैनीताल में कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के हिंदी विभाग के सहयोग से सोमवार को विचार गोष्ठी हुई। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रवाद की मूल सोच गांव-गांव तक लोकतांत्रिक व्यवस्था, शिक्षा और जागरूकता पहुंचाने और गरीबी मिटाने की थी, जो पूरी तरह साकार नहीं हो सकी।
उनका मत था कि सत्ता में बैठे कुछ लोगों ने अवसरवाद के चलते इस अवधारणा को अलग रूप दे दिया। वक्ताओं के अनुसार सच्चा राष्ट्रवाद तब आएगा जब महंगाई, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे मूल सवालों का समाधान होगा।
कार्यक्रम में दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन को श्रद्धांजलि दी गई और पत्रकारिता में उनके योगदान को याद किया गया।
वक्ताओं ने भाषा को संस्कृति और पहचान का आधार बताया, बहुभाषी बनने की जरूरत जताई और कहा कि कोई भी भाषा दूसरी की प्रतिद्वंद्वी नहीं होती। साथ ही लोगों से अधिक समाचार पत्र पढ़ने का आग्रह किया गया।




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