शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति का सबसे सशक्त आधार मानी जाती है, किंतु जब विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन (एमडीएम) और स्वच्छ वातावरण ही उपलब्ध न हो, तब शिक्षा के दावों की वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। बिहार में सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवाल इसी ओर संकेत करते हैं कि योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक अपेक्षित रूप में नहीं पहुंच पा रहा है। इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है।
वर्तमान व्यवस्था में मध्याह्न भोजन, विद्यालयों की सफाई, चौकीदार, बेंच-डेस्क और अन्य आवश्यक सेवाओं का संचालन बड़े पैमाने पर गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) के माध्यम से कराया जा रहा है। उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना था, लेकिन अनेक स्थानों से मिल रही शिकायतें इस मॉडल की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। एक ही संस्था के जिम्मे दर्जनों विद्यालय होने के कारण भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और समयबद्ध आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों के कई अभिभावकों का कहना है कि बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालय का मध्याह्न भोजन नहीं खाते, जिससे योजना का मूल उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है।
स्वच्छता की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। विद्यालयों में सफाई कर्मियों को समय पर भुगतान न मिलने की शिकायतें आम हैं। परिणामस्वरूप कई स्कूलों में शौचालयों और परिसर की नियमित सफाई नहीं हो पाती। इसका सीधा प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य, उपस्थिति और अध्ययन के वातावरण पर पड़ता है। प्रधानाध्यापक और शिक्षक भी कई बार विभाग तथा सेवा प्रदाता संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने तक सीमित रह जाते हैं, जबकि वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता। यदि इन शिकायतों में तथ्य हैं, तो यह केवल प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि गरीब विद्यार्थियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।
सरकार को चाहिए कि मध्याह्न भोजन और स्वच्छता जैसी मूलभूत योजनाओं का स्वतंत्र एवं नियमित सामाजिक ऑडिट कराए, भुगतान व्यवस्था को पारदर्शी बनाए और जवाबदेही तय करे। शिक्षा केवल भवन, नामांकन और आंकड़ों से बेहतर नहीं होती, बल्कि बच्चों को सम्मानजनक वातावरण, पौष्टिक भोजन और स्वच्छ परिसर उपलब्ध कराने से मजबूत बनती है। यदि इन बुनियादी आवश्यकताओं की अनदेखी होती रही, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।




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