11 अक्टूबर, 2026  |  15:55 IST
Jila Nazar
रविवार, 11 अक्टूबर 2026
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बस्ती के विकास पर मंथन, काष्ठ शिल्प और सिरके को पहचान बनाने की बात

एक परिचर्चा में वक्ताओं ने उद्योग, यातायात, स्वास्थ्य और पर्यटन के जरिये जिले की तरक्की के रास्ते तलाशे और स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार की जरूरत बताई।

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बस्ती के विकास पर मंथन, काष्ठ शिल्प और सिरके को पहचान बनाने की बात
प्रतीकात्मक चित्र: Shailendrakjaiswal / CC BY-SA 4.0 / Wikimedia Commons

'विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित बस्ती' विषय पर गुरुवार को हुए पहले सत्र में जिले की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बातचीत उद्योग और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित रही। वक्ताओं का मानना था कि उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिले तो बस्ती को नई दिशा मिल सकती है।

हरैया क्षेत्र के विधायक अजय सिंह ने कहा कि आजादी के बाद जिले में कई चीनी मिलें लगीं, पर उनमें से अनेक बंद हो गईं। उनके मुताबिक मुंडेरवा चीनी मिल फिर चालू कराई गई है और मेडिकल कालेज, इंजीनियरिंग कालेज व अटल आवासीय विद्यालय भी शुरू हुए हैं। उन्होंने काष्ठ शिल्प और सिरके को बस्ती की उभरती पहचान बताया।

उद्यमी सुभाष शुक्ल ने दवा निर्माण और मेडिकल उपकरणों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर शुरू करने का सुझाव दिया, ताकि रोजगार बढ़े। उद्यमी अखिलेश दुबे ने कहा कि गांव-गांव सड़कें पहुंचने से आवागमन आसान हुआ है और बस सेवाओं का दायरा भी बढ़ा है।

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जिला नज़र डेस्क · सम्पादकीय डेस्क

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